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सोमवार, 25 अक्टूबर 2010

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शनिवार, 23 अक्टूबर 2010

प्रस्तुतकर्ता वचनाराम देवासी दातवाडा रानीवाडा +919982611995 पर 3:22 am कोई टिप्पणी नहीं:
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प्रस्तुतकर्ता वचनाराम देवासी दातवाडा रानीवाडा +919982611995 पर 3:05 am कोई टिप्पणी नहीं:
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वचनाराम देवासी दातवाडा रानीवाडा +919982611995
मैं न जानू की कौन हूँ मैं, लोग कहते है सबसे जुदा हूँ मैं, मैने तो प्यार सबसे कीया, पर न जाने कीतनो ने धोखा दीया। चलते चलते कीतने ही अच्छे मीले, जीनने बहुत प्यार दीया, पर कुछ लोग समझ ना सके, फीर भी मैने सबसे प्यार कीया। दोस्तो के खुशी से ही खुशी है, तेरे गम से हम दुखी है, तुम हंसो तो खुश हो जाऊंगा, तेरे आँखो मे आँसु हो तो मनाऊंगा। मेरे सपने बहुत बढे़ है, पर अकेले है हम, अकेले है, फीर भी चलता रहऊंगा, मंजील को पाकर रहऊंगा। ये दुनीया बदल जाये पर कीतनी भी, पर मै न बदलऊंगा, जो बदल गये वो दोस्त थे मेरे, पर कोई ना पास है मेरे। प्यार होता तो क्या बात होती, कोई तो होगी कहीं न कहीं, शायद तुम से अच्छी या, कोई नहीं नही इस दुनीया मे तुम्हारे जैसी। आसमान को देखा है मैने, मुझे जाना वहाँ है, जमीन पर चलना नही, मुझे जाना वहाँ है, पता है गीरकर टुट जाऊंगा, फीर उठने का वीश्वास है मै अलग बनकर दीखाऊंगा । पता नही ये रास्ते ले जाये कहाँ, न जाने खत्म हो जाये, कीस पल कहाँ, फीर भी तुम सब के दीलो मे जीन्दा रहऊंगा, यादो मे सब की, याद आता रहऊंगा।
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